बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को मुंबई पुलिस द्वारा पालघर लिंचिंग की घटना की कवरेज और बांद्रा रेलवे स्टेशन में प्रवासी मजदूरों के इकट्ठा होने पर रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क और एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी के खिलाफ सभी एफआईआर को निलंबित कर दिया है।

इसके साथ ही एनएम जोशी मार्ग और पायधुनी पुलिस स्टेशनों पर दर्ज एफआईआर में सभी कार्यवाही निलंबित रहेगी। बता दें, अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक के ग्रुप सीएफओ (CFO) एस सुंदरम से इस मामले में एनएम जोशी मार्ग पुलिस स्टेशन में दो बार पूछताछ की गई थी।

हाईकोर्ट ने कहा कि घटनाओं की इस कवरेज में कुछ भी सांप्रदायिक नहीं था। ”ये साफ है कि दो हिंदुओं की हत्या को रिपोर्ट किया गया। याचिकाकर्ता ने कांग्रेस और एसजी (सोनिया गांधी) पर विशेष रूप से सांप्रदायिक होने का आरोप लगाया था।

लेकिन जब प्रसारण को पूरा पढ़ा गया तो यह सांप्रदायिक नहीं है। यह नहीं कहा जा सकता है कि धार्मिक समूहों के बीच विघटन या दंगा प्रोत्साहित किया गया। ना तो याचिकाकर्ता का बयान, ना ही उसके आचरण को घृणा पैदा करने वाला कहा जा सकता है।

एक विचार यह लिया जा सकता है कि याचिकाकर्ता की टिप्पणियां काफी तीखी थीं। SC ने माना कि मानहानि के अपराध की जांच नहीं की जा सकती है।”

अर्नब गोस्वामी का बयान

एफआईआर के निलंबित होने के बाद अर्नब गोस्वामी ने कहा, ‘हम हमारी कानूनी टीम के प्रति बहुत आभारी हैं और मैं हरीश साल्वे जी जिन्होंने हमारी ओर से केस लड़ा उसके लिए उनका धन्यवाद करता हूं। मैं फीनिक्स लीगल की पूरी टीम को इस पूरी लड़ाई में मेरे साथ रहने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं।’

यह कहते हुए कि ये कांग्रेस पार्टी और उसके प्रमुख की हार है। अर्नब गोस्वामी ने कहा, ”एक पत्रकार के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज किए गए, उसे एक राज्य से दूसरे राज्य तक घसीटने के लिए। पुलिस का इस्तेमाल, अपनी सरकार का उपयोग किया गया।”