दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से 62 सीटों पर जीत हासिल की।

दिल्ली विधासभा चुनाव में आतिशी, राघव चड्ढा और दिलीप पांडे समेत आम आदमी पार्टी के सभी बड़े उम्मीदवारों की जीत के बाद अब सबकी निगाहें मंत्रिमंडल पर टिक गई हैं।

इस चुनाव में आम आदमी पार्टी के निवर्तमान मंत्रियों ने भी जीत हासिल की है। आम आदमी पार्टी (आप) के एक पदाधिकारी ने कहा कि पार्टी अपने आलाकमान के साथ विस्तृत चर्चा के बाद ही इस मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगी।

केजरीवाल के करीबियों में शुमार आतिशी, चड्ढा और पांडे ने अपने पहले विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल की है। तीनों नेता पिछले साल लोकसभा चुनाव में हार गए थे। ये तीनों फिलहाल आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता भी हैं।

यह पूछे जाने पर कि क्या तीनों नेताओं को आप सरकार में मंत्री पद दिया जाएगा तो पार्टी के एक नेता ने कहा कि इस बारे में अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है।

संविधान के अनुसार दिल्ली में मंत्रियों की संख्या विधायकों की कुल संख्या की 10 प्रतिशत हो सकती है, जिनमें मुख्यमंत्री सबसे ऊपर होता है। दिल्ली विधासभा में 70 सीटें हैं।

पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट राघव चड्ढा ने राजेन्द्र नगर सीट पर 20,058 मतों के अंतर से जीत हासिल की। वहीं, आतिशी को कालकाजी जबकि पांडे को तिमारपुर सीट से जीत मिली है।

आप के एक और बड़े नेता सौरभ भारद्वाज भी मंत्रिमंडल में जगह बनाने वालों की दौड़ में शामिल हैं। वह 2013 में आम आदमी पार्टी की 49 दिन की सरकार में परिवहन मंत्री थे।

केजरीवाल के अलावा आम आदमी पार्टी के सभी निवर्तमान मंत्रियों, मनीष सिसोदिया, गोपाल राय, इमरान हुसैन, कैलाश गहलोत, राजेन्द्र पाल गौतम, और सत्येन्द्र कुमार जैन ने भी अपनी-अपनी सीटों से जीत हासिल की है।

अब अरविंद केजरीवाल तीसरी बार 16 फरवरी को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

शपथग्रहण समारोह 16 फरवरी को सुबह 10 बजे रामलीला मैदान में आयोजित किया जाएगा।

इस समरोह में आम आदमी पार्टी के कई नेता कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ले सकते हैं।

खबरों की मानें तो समारोह में अरविंद केजरीवाल द्वारा सीएम पद की शपथ लेने के साथ ही मनीष सिसोदिया, गोपाल राय, कैलाश गहलोत, राघव चड्ढा, अमानतुल्लाह खान, सत्येंद्र कुमार जैन, सौरभ भारद्वाज और राखी बिड़ला कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर सकते हैं।

इस चुनाव में भाजपा जहां केवल 8 सीटें ही जीत सकी वहीं कांग्रेस तो एक बार फिर से अपना खाता ही नहीं खोल सकी।