बहुत समय पहले की बात है, एक लक्कड़हारा एक जंगल से गुजर रहा था। अचानक, उसकी नज़र एक पेड़ के नीचे, एक पिंजरे पर पड़ी। पास जाने पर उसे उस पिंजरे में एक चील दिखाई दी।

लक्कड़हारे को चील पर बहुत दया आई और उसने वह पिंजरा खोल कर उसे आजाद कर दिया। चील दूर आकाश में उड़ गई। कुछ दिन बाद वही लक्कड़हारा एक ऊँची पहाड़ी पर, एक चट्टान पर बैठकर अपना खाना खा रहा था।

उसी वक्त आकाश से एक चील आई और उसकी टोपी लेकर उड़ गई। हैरान लक्कड़हारा, उस चट्टान से नीचे उतर कर उसके पीछे भागा। जैसे ही वह पहाड़ी से नीचे उतरा,

उसे पहाड़ी से चट्टान के नीचे गिरने की बहुत तेज़ आवाज़ सुनाई दी। यह वही चट्टान था जिस पर वह बैठकर खाना खा रहा था। चील ने लक्कड़हारे की जान बचाकर उसे धन्यवाद दिया थ

एक बार, एक जंगल में एक भेड़िया रहता था। वह बहुत बूढ़ा हो गया था और बीमार भी था। बुढ़ापे और बीमारी के कारण वह कई दिनों से शिकार पर नहीं जा पाया था। उसकी हालत बहुत खराब थी।

एक दिन, उसने पास के तालाब में पानी पीती हुई एक छोटी भेड़ देखी। उसे देखकर भेड़िये के मुँह में पानी आ गया। भेड़िया उस छोटी भेड़ से बोला-“बेटी! मुझ पर एक उपकार करो।

मेरे लिए तालाब से थोड़ा पानी ला दो। तुम देख ही रहे हो मेरी तबीयत कितनी खराब है। अगर तुम मुझे थोड़ा पानी ला दो तो, मुझे थोड़ी ताकत मिल जाएगी और मैं अपना भोजन ढूंढ लूंगा।” छोटी भेड़ समझदार थी।

उसने जवाब दिया-“अगर मैं तुम्हारे लिए पानी लेकर तुम्हारे पास आयी तो तुम्हें भोजन ढूंढने की क्या ज़रूरत होगी।” ऐसा कह कर वह छोटी भेड़ वहाँ से भाग गयी।