प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अमेरिका में तैयार विशेष विमान बोइंग 777 आज भारत में उतरने वाला है। अमेरिका के राष्ट्रपति के एयरफोर्स वन जैसे क्षमताओं से लैस इस विमान में कई खूबियां हैं।

विशेष विमान का प्रयोग पीएम के अलावा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति भी करेंगे। फिलहाल अभी तक मोदी ने एयर इंडिया-वन कॉल साइन से बोइंग-747 इस्तेमाल करते रहे हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार आज किसी भी समय प्लेन भारत पहुंच सकता है।

बख्तरबंद बोइंग 777 एक बार ईंधन भरने पर यह अमेरिका से भारत तक की लंबी उड़ान पर जा सकता है। सुपर वीआईपी प्लेन को आने वाले वक़्त में एयर इंडिया नहीं, बल्कि एयरफोर्स आपरेट करेगी। सूत्रों के अनुसार इसका कॉल साइन एयरफोर्स-वन रखा जा सकता है।

इसमें तीन तरह के रंगों का प्रयोग किया गया है। इनमें से दो रंग अमेरिकी राष्ट्रपति के एयरफोर्स वन से मिलते-जुलते हैं। सूत्रों का कहना है कि इसमें हल्का नीला और सफेद रंगं का इस्तेमाल अधिक किया गया है और नारंगी रंग की हवाई जहाज के बीच में लाइन दी गई है। देखने में यह बहुत सुंदर है।

विशेष विमान बोइंग 777 को एयरफोर्स के पायलट उड़ाएंगे। इन दोनों विशेष विमानों की राशि करीब 8458 करोड़ रुपये है। बहुत सेफ इस जहाज के अगले हिस्से में जैमर लगा है जो दुश्मन के रेडार सिग्नल को जाम कर देता है।

विमान पर मिसाइल हमले का भी असर नहींहोगा । खबरों के अनुसार इस विमान में हवा में ही ईंधन भरने की क्षमता होगी। और साथ ही यह विमान एक बार में भारत से अमेरिका तक की दूरी के बीच उड़ान भर सकेगा।

इस विशेष विमान में बहुत सी खुबिया है जैसे इसमें मिरर बॉल सिस्टम का भी प्रयोग किया गया है। यह आधुनिक इंफ्रारेड सिग्नल से चलने वालीं मिसाइलों को भी भ्रमित कर सकता है। विमान की कई फोटो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही हैं।

एयरक्राफ्ट एडवांस डिफेंस सिस्टम से लैस है और मिसाइल अटैक को नाकाम करके पलटवार भी कर सकता है।

इस विमान में हवा में ईंधन भरा जा सकता है। ईंधन भरने के बाद यह लगातार 17 घंटे तक उड़ान भर सकता है।

विमान भारत से अमेरिका तक करीब साढ़े 12 हजार किमी की दूरी एक बार में तय कर सकता है।

इस विमान में वीआईपी के लिए बड़े केबिन हैं और इसके अलावा एक मेडिकल सेंटर भी है।

एयरक्राफ्ट में मीडिया के लिए भी जगह दी गई है। पीछे की सीटें इकोनॉमी क्लास हैं और बाकी सीटें बिजनेस क्लास हैं।

दोनों विमान की कीमत करीब 8,458 करोड़ रुपए है। विमान के उड़ान के दौरान हर घंटे करीब 1 करोड़ 30 लाख रु. की लागत आती है।

अमेरिका से दो विमानों की डील हुई है

भारत ने अमेरिका से दो बोइंग-777 ईआर एयरक्राफ्ट (एयर इंडिया वन) खरीदने की डील की थी। इनमें से एक भारत आ चुका है। एयर इंडिया वन (बी-777) एयरक्राफ्ट की सभी तरह की टेस्टिंग पहले ही की जा चुकी है।

अभी एयर इंडिया को यह विमान मिला है और इसे बाद में भारतीय वायुसेना को हैंडओवर किया जाएगा। जब तक वायुसेना के पायलट इस विमान को उड़ाने में एक्सपर्ट नहीं हो जाएंगे, तब तक एयर इंडिया के पायलट भी एयरक्राफ्ट ऑपरेटिंग टीम का हिस्सा रहेंगे।

भारत को कैसे मिले बोइंग 777-300 ईआर?

काफी लंबे समय से नए विमानों की खरीद पर चर्चा चल रही थी। जरूरत ये भी महसूस की गई कि नए विमान टू-इंजन या फोर-इंजन होने चाहिए। सरकार ने बोइंग 747 को रिप्लेस करने के लिए बोइंग 777-300 ईआर को चुना।

2006 में एयर इंडिया ने बोइंग को 68 विमानों का ऑर्डर दिया। इसमें 27 ड्रीमलाइनर, 15 बोइंग 777-300ईआर, 8 बोइंग 777-200 एलआर और 18 बोइंग 737-800 शामिल हैं।

24 जनवरी 2018 को तीन बोइंग 777-300 ईआर भारत को मिल चुके हैं। इनमें से दो को वीवीआईपी मोडिफिकेशन के लिए दोबारा अमेरिका भेजा गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति के एयरफोर्स वन की तर्ज पर बोइंग 777-300 ईआर का कमर्शियल इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया जाएगा। जैसे इससे पहले बोइंग-747 विमानों का कमर्शियल यूज भी होता था और वीवीआईपी के लिए भी इनका इस्तेमाल होता था। डिफेंस मिनिस्ट्री बोइंग 777-300 ईआर को एयर इंडिया से खरीदेगी।

एक बात और कि इन नए विमानों को एयरफोर्स के पायलट ही उड़ाएंगे, एयर इंडिया के नहीं। हालांकि, इन विमानों के रखरखाव की जिम्मेदारी एयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेस लिमिटेड के पास होगी, जो एयर इंडिया की सब्सिडियरी है।