नमस्कार मित्रो जैसा कि आप जानते है कि अभी वर्तमान में महाराष्ट्र की सियासत में सरकार बनाने को लेकर संग्राम मचा है. एक तरफ शिवसेना है, जो किसी भी तरह से महाराष्ट्र में शिवसेना का मुख्यमंत्री बनाना चाहती है तो दूसरी तरफ एनसीपी है, जो अपनी शर्तों पर शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाना चाहती है.

वहीं, कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती इंदिरा गाँधी अभी तक तय ही नहीं कर सकी है कि हिंदूवादी पार्टी शिवसेना से समर्थन ले या नहीं क्युकी अगर शिवसेना से समर्थन लेती है तो उसे मुस्लिम वोटरों की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है
कल कांग्रेस के सबसे बड़े नेता अहमद पटेल, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार के साथ एनसीपी कार्यालय में बैठक की.

सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में कांग्रेस – एनसीपी ने चार अहम बातो पर चर्चा हुई. एनसीपी ने शिवसेना को समर्थन देने के पीछे इस बात की शर्त रखी है कि स्थाई सरकार के लिए कांग्रेसशिवसेना में शामिल हो जबकि कांग्रेस का जोर कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर रहा.

रोटेशनल सीएम चाहती है एनसीपी

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस और एनसीपी की बैठक में मुख्यमंत्री पद को लेकर भी चर्चा हुई है. मीटिंग में एनसीपी ने फॉर्मूला रखा कि शिवसेना और उसके बीच ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद का बंटवारा किया जाए, जबकि कांग्रेस को पूरे पांच साल के लिए डिप्टी सीएम का पद मिले.

42 मंत्रियों वाला फॉर्मूला

शिवसेना को समर्थन देने के पीछे कांग्रेस का फॉर्मूला यह है कि महाराष्ट्र कैबिनेट में 42 कैबिनेट मंत्री बनाए जाएं और उनमें से शिवसेना और एनसीपी के साथ 14-14 मंत्री बांटे जाएं. यानी कांग्रेस-शिवसेना और एनसीपी के 14-14 मंत्री सरकार में रहें. इसके साथ ही कांग्रेस अपना गृहमंत्री और वित्तमंत्री चाहती है आपको मालूम हो यही दोनों मंत्रालय सरकार में सबसे ज्यादा महत्वपूर्व माने जाते है

फ़िलहाल ये देखना दिलचस्प होगा कि शिवसेना कांग्रेस – और एनसीपी की शर्तो को मानती है या नहीं क्योकि शिवसेना के लिए 2. 5 साल का मुख्यमंत्री एनसीपी को देना उद्दव ठाकरे कदापि नहीं चाहेंगे

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