बेबी बोनस पाने वाले 50 साल के जुक्का-पेक्का टुइक्का और 48 साल की उनकी पत्नी जेनिका कृषि उद्यमी हैं.उनकी दूसरी बेटी जेनेट 2013 में पैदा हुई थी. जन्म के साथ ही उसे “टेन थाउजेंट यूरो गर्ल” का उपनाम मिल गया था.

टुइक्का कहते हैं, “हमारी उम्र बढ़ रही थी और कुछ समय से हम दूसरे बच्चे की योजना बना रहे थे. इसलिए मैं नहीं कह सकता कि वास्तव में पैसे ने हमारे फ़ैसले को प्रभावित किया.”

फिर भी टुइक्का को लगता है कि पैसे देने का फ़ैसला अहम कदम है जिससे पता चलता है कि स्थानीय नेता परिवारों के लिए मदद का हाथ बढ़ाने में दिलचस्पी रखते हैं.

टुइक्का के परिवार को अब तक 6,000 यूरो मिले हैं जिसे उन्होंने बचा रखा है. वे इस पैसे का इस तरह इस्तेमाल करेंगे जिससे भविष्य में सबको फायदा हो.फ़िनलैंड की कई अन्य नगर पालिकाओं ने भी कुछ सौ यूरो से लेकर 10 हज़ार यूरो तक का बेबी बोनस शुरू किया है.

इन स्थानीय प्रोत्साहनों के बावजूद फ़िनलैंड में राष्ट्रीय जन्म दर नहीं बढ़ रही. यूरोप के कई अन्य देशों की तरह पिछले दशक में इसमें बड़ी गिरावट आई है.

2018 में यह दर प्रति महिला 1.4 तक गिर गई. दस साल पहले यह 1.85 थी.