मेरिका के ओकहोमा के एक अदालत ने उस वक्त हैरान कर दिया जब उसने कहा कि स्टेट लॉ में ओरल सेक्स रेप की श्रेणी नहीं आता है, जब पीड़िता अपने होश में न हो। कोर्ट की इस टिप्पणी आने के बाद कड़ी आलोचना की जा रही है। लोगों का कहना है कि न्याय सिस्टम अब पीड़िता को ही अपराधी बताने लगा है।

कोर्ट के इस फैसले के बाद आलोचना में कहा जा रहा है कि रेप के संबंध में पुरानी सोच को फिर से मान्यता मिल रही है। ओकहोमा। अमेरिका के ओकहोमा के एक अदालत ने उस वक्त हैरान कर दिया जब उसने कहा कि स्टेट लॉ में ओरल सेक्स रेप की श्रेणी नहीं आता है, जब पीड़िता अपने होश में न हो।

कोर्ट की इस टिप्पणी आने के बाद कड़ी आलोचना की जा रही है। लोगों का कहना है कि न्याय सिस्टम अब पीड़िता को ही अपराधी बताने लगा है। कोर्ट के इस फैसले के बाद आलोचना में कहा जा रहा है कि रेप के संबंध में पुरानी सोच को फिर से मान्यता मिल रही है।

जानकारी के अनुसार, एक 17 साल के लड़के ने 16 साल की एक लड़की जो नशे के हालत में थी, उसको अपना शिकार बनाया। लड़के ने लड़की को घर पहुंचाने के लिए कार में बैठाया। एक पार्क में दोस्तों के एक ग्रुप के साथ शराब पी। लड़की ने काफी शराब पी ली थी। लड़की बिल्कुल होश में नहीं थी।

चश्मदीदों का कहना है कि लड़की फिर उसी कार में गई। एक दूसरे लड़के का कहना है कि लड़की पूरी तरह से बेहोश थी। उस लड़के ने लड़की को उसकी नानी के घर पहुंचाया। वह तब भी बेहोश थी।

लड़की को हॉस्पिटल में ले जाया गया। वहां टेस्ट से पता चला कि उसके ब्लड में ऐल्कॉहॉल लेबल 34 से भी ऊपर है। लड़की की इसके बाद रेप होने की जांच की गई तो टेस्ट से इस बात की पुष्टि हुई कि उस लड़के का डीएनए लड़की के शरीर पर था। खासतौर पर उसकी पीठ और मुंह के चारों तरफ ज्यादा था।

लड़के ने बताया कि लड़की ने सहमति से ओरल सेक्स कराया था। लड़की का कहना है पार्क के बाद उसे कुछ भी पता नहीं है कि उसके साथ क्या हुआ। लड़की के वकील ने आरोप लगाया है कि लड़के ने जबरन ओरल सेक्स किया है।

ट्रायल जज ने इस केस को खारिज करते हुए कहा कि जब लड़की होश में ही नहीं थी तब प्रॉसिक्युटर इस पर रेप का नियम नहीं लगा सकते। कोर्ट ने कहा, ‘जबरन एनल या ओरल सेक्स नहीं किया जा सकता जब पीड़िता भयानक रूप से नशे की हालत में हो।